राज्यपाल- राज्यपाल की शक्तियां एवं कार्य

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राज्यपाल को राष्ट्रपति के तरह ही कार्यकारी विधाई वित्तीय और न्यायिक शक्तियां मिलती है जबकि राज्यपाल को राष्ट्रपति के समान कूटनीतिक और सैन्य या फिर आपातकालीन शक्तियां जो है वह नहीं मिलती है आज हम जानेंगे कि राज्यपाल को कौन कौन सी शक्तियां प्राप्त होती है और वह कितना पावरफुल होता है इससे पहले मैंने राज्यपाल के बारे में बताया था आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

कार्यकारी शक्तियां-

राज्य सरकार के सभी कार्य औपचारिक रूप से राज्यपाल के नाम होते हैं वह किसी भी संबंध में नियम बना सकता है राज्यपाल मुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्रियों सहित राज्य के महाधिवक्ता राज्य निर्वाचन आयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को नियुक्त करता है वह राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होता है उनके पास यह अधिकार होता है कि वह विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को नियुक्त करें

विधाई शक्तियां

राज्यपाल राज्य विधानसभा का अभिन्न अंग होता है वह राज विधानसभा के सत्र को बुला सकता है या फिर उसे विघटित भी कर सकता है। वह विधानमंडल के हर चुनाव के पहले या बाद में सत्र को संबोधित कर सकता है वह किसी भी सदन या विधानमंडल के सदनों को विचाराधीन विधेयकों या फिर किसी अन्य मसलों पर संदेश भेज सकता है।

जब विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद खाली हो, तो वह विधानसभा के किसी सदस्य को अप्वॉइंट कर सकता है वह राज्य विधान परिषद के कुल सदस्यों के छठे भाग को नामित कर सकता है राज्य विधान मंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को राज्यपाल के पास भेजे जाने पर वह उस विधेयक को स्वीकार कर सकता है या फिर स्वीकृति के लिए उसे रोक सकता है या विधेयक को विधानमंडल के पास पुनर्विचार के लिए वापस कर सकता है लेकिन अगर विधानमंडल फिर से बिना किसी परिवर्तन के विधायक को पास कर दिया जाता है तो राज्यपाल को अपनी स्वीकृति देनी होती है या राष्ट्रपति उस विधेयक को राष्ट्र राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है

उदाहरण के लिए जहां राज्य विधान मंडल द्वारा पारित विधेयक हाई कोर्ट की स्थिति को खतरे में डालता हूं या संविधान के बंधुओं के विरुद्ध हो या राज्य नीति के निदेशक तत्वों के विरुद्ध या देश के व्यापक हित के विरुद्ध या राष्ट्रीय महत्व का हो यह संविधान के अनुच्छेद 31 क तहत संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण से संबंधित हो यदि किसी राज्य विधानमंडल का सत्र ना चल रहा हो तो वह औपचारिक रूप से अध्यादेश की घोषणा कर सकता है। इन विधेयकों की राज्य विधानमंडल से 6 हफ्तों के भीतर स्वीकृति होनी आवश्यक है वह किसी भी समय किसी भी अध्यादेश को समाप्त कर सकता है यह राज्यपाल का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है कि वह किसी भी अध्यादेश को किसी भी वक्त समाप्त कर सकता है वह चाहे तो राज्य के लेखों से संबंधित राज्य वित्त आयोग राज्य लोक सेवा आयोग और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट को राज्य विधानसभा के सामने प्रस्तुत कर सकता है।

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