यह राज्यपाल क्या होता है और इस की नियुक्ति कौन करता है?

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भारत के संविधान में जिस तरह केंद्र की सरकार की परिकल्पना की गई है, उसी तरह राज्य के लिए भी है। इसको आमतौर पर संसदीय व्यवस्था कहते हैं, संविधान के छठे भाग में राज्य की सरकार के बारे में बताया गया है। छठे भाग के अनुच्छेद 153 से 167 तक इसमें राज्य कार्यपालिका के बारे में बताया गया है, जिसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री परिषद और राज्य के महाधिवक्ता माने एडवोकेट जनरल आते हैं। राज्य में कोई उपराज्यपाल नहीं होता, जिस तरह केंद्र में उपराष्ट्रपति होते हैं। मोटा माटी मान लिया जाए तो राज्यपाल राज्य के कार्यकारी प्रमुख होते हैं माने की संवैधानिक मुखिया। इस तरह राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करता है सामान्य तौर पर हर राज्य में एक राज्यपाल होता है लेकिन 7 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1956 की धारा के अनुसार एक ही व्यक्ति को एक से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।

आखिर राज्यपाल की नियुक्ति होती कैसे है?

किसी राज्य का राज्यपाल ना तो जनता द्वारा सीधे चुना जाता है और ना ही राष्ट्रपति की तरह अप्रत्यक्ष रूप से। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है इस प्रकार कह सकते हैं की राज्यपाल केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत होता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट की 1979 की व्यवस्था के अनुसार राज्यपाल का कार्यालय एक स्वतंत्र संवैधानिक कार्यालय है और केंद्र सरकार के अधिनस्थ नहीं है।

जब संविधान सभा में संविधान बन रहा था उस वक्त राज्यपाल के सीधे निर्वाचन की बात उठी थी लेकिन संविधान सभा ने वर्तमान व्यवस्था माने राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति को ही अपनाया था। यह कनाडा के संविधान से लिया गया है।

राज्यपाल की योग्यता क्या होनी चाहिए?

संविधान में राज्यपाल की योग्यता को बताते हुए लिखा है कि उसे भारत का नागरिक होना चाहिए और दूसरा वह 35 वर्ष की आयु पूरा कर चुका हो। समय के साथ इसमें दो अन्य परंपराएं भी जुड़ गई है, पहला उसे बाहरी होना चाहिए मतलब की वह जिस राज्य में राज्यपाल बनने वाला हो वह उस राज्य का ना हो, और दूसरा जब राज्यपाल की नियुक्ति हो तब राष्ट्रपति उस राज्य के मामले में मुख्यमंत्री से परामर्श करें ताकि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था सुनिश्चित हो लेकिन इन दोनों परंपराओं का कुछ मामलों में उल्लंघन किया गया है।

राज्यपाल के पद की क्या शर्ते हैं?

संविधान में राज्यपाल के पोस्ट के लिए कई शर्तों का निर्धारण किया गया है, पहला, उसे ना तो संसद सदस्य होना चाहिए और ना ही विधानमंडल का सदस्य। यदि ऐसा कोई आदमी जो राज्यपाल नियुक्त होने वाला है तो उसे पहले सदन से इस्तीफा देना होगा तभी जाकर वह राज्यपाल का पद ग्रहण कर सकता है।

दूसरा, उसे किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।

तीसरा ,यदि वही व्यक्ति दो या अधिक राज्यों में बतौर राज्यपाल नियुक्त होता है तो उसके भत्ते राष्ट्रपति द्वारा तय मानकों के हिसाब से राज्य मिलकर प्रदान करेंगे

चौथा, किसी भी राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उसकी आर्थिक उपलब्धियों और भक्तों को कम नहीं किया जा सकता।

2008 में संसद ने राज्यपाल का वेतन ₹36000 से बढ़ाकर 110000 प्रतिमाह कर दिया है।

राष्ट्रपति की ही तरह राज्यपाल को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त है जैसे कार्यकाल के दौरान उसे किसी भी आपराधिक कार्यवाही की सुनवाई से उन्मुक्ति प्राप्त है, मतलब उसे गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजा जा सकता। लेकिन 2 महीने के नोटिस पर व्यक्तिगत क्रियाकलापों पर उनके विरुद्ध नागरिक कानून संबंधी कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

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1 Response

  1. August 10, 2019

    […] राज्यपाल के बारे में बताया था आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते […]

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